याद

 याद 


सौंफ कट चुकी है

मगर उसकी ख़ुशबू नहीं

डंठलों में भी उतनी ही ख़ुशबू है

जो अभी कुछ दिन और रहेगी हवाओं में


तुम्हारे चले जाने पर भी

तुम्हारी याद की ही तरह

यह तपेगी

जलेगी

ढह पड़ेगी


— विजय राही

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